शनिवार, 16 अप्रैल 2011

नई शुरूआत

बहुत दिनों के सोच रहा था कि बिलोग शुरू करू ताकि palera.page.tl के सभी उपयोगकर्ता मुझ से प्रश्‍न कर सके और मैं यथा समंभव बिश्‍लेषण कर सकू. साथ ही बहुत सी जानकारी जो मुझे रोज प्राप्‍त होती है उस को भी आप के बीच बांट

शनिवार, 29 मार्च 2008

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ये रिश्ते सूरज से ढल चुके हैं
पानी मे गल चुके है
तेरी याद आई नही है
और भुलाने की कोई कसम खाई नही है
मैं सुस्त बेजान सा विचार शून्य मे हूँ बस काफी है
हाथ अगढ़ई के लिए भी उठते नही है
सिर दुआओं के लिए भी झुकते नही है
मैं एक कामयाब आदमी कामयाब हुआ आज तुम्हे भुलाने मे
किंतु पा न सका मैं कामयाब आदमी

शुक्रवार, 29 जून 2007

कविता

कविता मन का एक उदगार है जो शब्‍दो कि सुगंध लेकर उडता जाता है सुनने वाले को एक रस का अनुभव कराता है य‍ानि प्रत्‍येक कविता मधुर होती है लेकिन हम उसे जितने सुन्‍दर शब्‍दो के साथ सजा सके वह रोचकता प्रदान करता हैं‍ ‍कवि जो दूर नही पर आपने अपने विचारो को ‍लय देने कि कोशिश ही नही की